खुशहाल जीवन
खुशहाल जीवन जीवन जिओ
हम इस दुनिया मै एक निश्चित अवधि का जीवन जीने आते हैं l चाहे हम किसी भी जात के हो किसी भी धर्म या प्रान्त के हों ,भगवान हम पर किरपा करते समय कोई भेद भाव नहीं करते ,सूरज सभी को सामान रूप से अपनी धूप एवं प्रकाश देता है , पृथ्वी एवं पर्यावरण सबको सामान रूप से जीवन का आयाम देते हैं l कानून सामान रूप से जीने एवं आय के अवसर देता है फिर भी कोई दुखी होता है और कोई खुश , आखिर क्यों , --------- सामान आय एवं धन होने पर भी एक इंसान हमेश खुश रहता है जबकि एक आदमी रोता रहता है आखिर क्यू ------------ सोचने की बात है l
खुशियों का सम्बन्ध धन एवं आय से केवल हमारी मूलभूत आवश्यकताओं तक ही सीमित है l एक बार हमारी आवश्यतकाए पूरी हो गईं तो फिर हमारी खुशियों का सीधा सम्बन्ध हमारी आय से नहीं रह जाता l हम जानते हैं की इस संसार मै कुछ भी स्थाई नहीं है कोई दुःख ,कोई ख़ुशी कोई पद ,सभी कुछ समय के होते है परन्तु हम जिस स्तिथि मै होते हैं उसे ही स्थाई मान लेते है और यही हमारे दुःखो का सबसे बड़ा कारण है l बड़ी अजीव से बात है की जिस स्तिथि या पद या भौतिक संसाधन को पाकर एक इंसान सन्तुष्ट नहीं है वही किसी के जीवन का सपना होता है l जिसके पास साईकिल है वह साईकिल से सन्तुष्ट नहीं है उसे मोटरसाइकिल चाहिए इसलिए वह दुःखी है उसका सपना और सोच है कि जीवन तभी खुशाल और सार्थक होगा यदि उसके पास मोटरसाइकिल होगी और जब तक उसके पास मोटरसाइकिल नहीं आती वह दुःखी रहता है l ऐसी प्रकार जिसके पास मोटरसाइकिल है उसकी चाहत एक कार होती है और वह कार पाने की चाहत मै दुखी है तथा मोटरसाइकिल से संतुष्ट नहीं है l यही सब दुःखों का कारण है l कोई बच्चा किसी परीक्षा मै केवल 50 % पाकर खुश है तो कोई 95 % पाकर भी दुःखी है सोचने की बात है l
खुशहाल जीवन का सीधा सम्बन्ध आवश्यकताओं एवं इक्छाओ से है l आवश्यकताए एक कुटिया मै भी पूरी हो सकतीं हैं और इक्छाएं एक महल मै भी अधूरी रह सकती हैं l इसलिए एक कुटिया मै खुशियाँ हो सकतीं हैं और एक महल मै दुःख l
अतः खुशहाल जीवन का अर्थ है निरोगी काया , मूल आवश्यकताएँ पूरी होने पर संतुष्ट होना l इक्छाएं एवं महत्वकांछाएँ रखें परन्तु पूरा न होने पर उसी से संतुष्ट रहें जो हमारे पास है l
खुशहाल जीवन ------
निरोगी काया
आवश्यनकताएँ पूरी होना
आगे बढ़ने की चाहत पर असफल होने पर दुःखी न होना l
हर किसी से उम्मीद न रखना l
भूतकाल एवं भविष्य के बारे मै अधिक न सोचना l
भाग्य से अधिक कर्म पर विश्वास रखना l
असफलता मिलने पर अपने से नीचे के एवं छोटे लोगों की तरफ देखना l
सफलता का नशा चढ़ने पर अपने से बड़े लोगों को देखना l
वर्ष मै एक बार समशान घाट का चक्कर लगाकर आना जहां दुनिया हिलने वाले हजारों लोग राख़ बने पड़े हैं , सोचना कि वो क्या कर गए एवं क्या ले गए l क्या उनके ना रहने से दुनिया पर कोई असर पड़ा l
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें