शांत समुद्रों में कुशल तैराक नहीं बनते
शांत समुद्रों में कुशल तैराक नहीं बनते जीवन का सबसे गहरा सत्य यह है कि मनुष्य की वास्तविक योग्यता सुख-सुविधा में नहीं , बल्कि संघर्षों की अग्नि में निखरती है। जो व्यक्ति केवल अनुकूल परिस्थितियों में जीता है , वह सामान्य बना रहता है ; पर जो विपरीत परिस्थितियों , असफलताओं , अपमान , अभाव और बाधाओं से लड़ते हुए आगे बढ़ता है , वही कुशल , परिपक्व और महान बनता है। इसी सत्य को यह प्रसिद्ध उक्ति अत्यंत प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करती है — “ शांत समुद्रों में कुशल तैराक नहीं बनते। ” आज अधिकांश लोग अपने Comfort Zone ( आरामदायक क्षेत्र) में रहना चाहते हैं। जहाँ न कोई जोखिम हो , न असफलता का भय , न परिश्रम की अधिक आवश्यकता। परन्तु सत्य यह है कि सुविधा के घेरे में रहकर न तो बड़ी सफलता प्राप्त होती है और न ही व्यक्ति कुशल बनता है। शांत जल में तैरना सीखना आसान है , परन्तु तूफ़ानी लहरों से जूझना ही वास्तविक तैराकी सिखाता है। उसी प्रकार जीवन में भी चुनौतियों से बचकर नहीं , बल्कि उनका सामना करके ही व्यक्तित्व का निर्माण होता है। समुद्र जब शांत होता है , तब कोई भी नाव चला सकता है। न लहरों का भय ...